UGC Guidelines को लेकर फैल रही अफवाहों की सच्चाई: क्या सच में “प्रपोज करने पर केस” लगेगा?
इन दिनों सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और कुछ राजनीतिक मंचों से यह दावा तेजी से फैलाया जा रहा है कि अगर कोई जनरल कैटेगरी की लड़की कॉलेज में जाती है और कोई OBC या SC समुदाय का लड़का उसे प्रपोज करता है, और लड़की मना कर देती है, तो उस लड़के पर UGC Act के तहत कार्रवाई हो जाएगी।
कुछ नेताओं द्वारा भी मंच से ऐसे बयान दिए गए हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच डर और भ्रम का माहौल बन गया है। लेकिन सवाल यह है -
• क्या वाकई ऐसा कोई कानून है?
• क्या सिर्फ प्रपोज करने पर केस लग सकता है?
• क्या यह जाति आधारित कानून है?
इस लेख में हम इन्हीं सवालों का तथ्यों और कानून के आधार पर जवाब देंगे।
सबसे पहले समझिए — यह कोई “UGC Act” नहीं है
सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी गलतफहमी यही फैलाई जा रही है कि यह कोई नया UGC Act (कानून) है, जबकि सच्चाई यह है कि:
• यह UGC Guidelines (दिशानिर्देश) हैं,
• जो कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए प्रशासनिक नियम होते हैं,
• जिनका उद्देश्य कैंपस में भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए एक सिस्टम बनाना है।
Guidelines का मतलब होता है कि संस्थान को एक कमेटी बनानी होगी, जो शिकायतों की प्रारंभिक जांच करेगी।
यह कोई अदालत नहीं है और न ही यह सीधे FIR दर्ज करती है।
प्रपोज करने पर केस” वाला दावा पूरी तरह भ्रामक
भारत के किसी भी कानून में किसी को सामान्य तरीके से प्रपोज करना अपराध नहीं है।
अपराध तब बनता है जब मामला हो
• जबरदस्ती
• बार-बार पीछा करना (stalking)
• मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न
• धमकी देना
ऐसे मामलों में पहले से ही कड़े कानून मौजूद हैं, जैसे:
• BNS (भारतीय न्याय संहिता)
• महिला सुरक्षा से जुड़े विशेष प्रावधान
• आईटी एक्ट (अगर ऑनलाइन उत्पीड़न हो)
UGC Guidelines इन कानूनों को न तो बदलती हैं, न ही खत्म करती हैं, और न ही ओवररूल करती हैं।
यह Guidelines सिर्फ SC/ST/OBC के लिए नहीं हैं
एक और बड़ा भ्रम यह फैलाया जा रहा है कि यह नियम केवल आरक्षित वर्ग के छात्रों के पक्ष में हैं।
जबकि असलियत यह है कि:
• इन कमेटियों में महिला प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल होती है
• महिला उत्पीड़न के मामलों में भी यही कमेटी प्राथमिक जांच कर सकती है
• यानी महिलाएं भी इसी सिस्टम के तहत सुरक्षा पा सकती हैं
मतलब साफ है
यह Guidelines किसी एक वर्ग को नहीं, बल्कि हर पीड़ित छात्र या छात्रा को सुरक्षा देने के लिए है।
कॉलेज स्तर पर ही समाधान हो यही असली मकसद
UGC का उद्देश्य यह नहीं है कि हर छोटी बात पुलिस स्टेशन पहुंचे।
बल्कि मकसद है:
• पहले कॉलेज स्तर पर निष्पक्ष जांच हो
• अगर मामला गंभीर है, तभी आगे कानूनी कार्रवाई हो
• छात्रों को तुरंत राहत मिले
पहले से ही कॉलेजों में मौजूद हैं
• Anti-Ragging Committee
• Internal Complaints Committee (ICC)
नई Guidelines उसी सिस्टम को और मजबूत करती हैं।
अफवाहें क्यों फैलाई जा रही हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को
• जाति
• जेंडर
• और सामाजिक असुरक्षा
से जोड़कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जाती है। जब यह कहा जाता है कि अब लड़के सुरक्षित नहीं हैं
तो असल में समाज को आपस में लड़ाने की कोशिश होती है, जबकि सच्चाई यह है कि कानून का मकसद केवल उत्पीड़न रोकना है, न कि सामान्य सामाजिक बातचीत को अपराध बनाना।
• यह कोई नया कानून नहीं बल्कि गाइडलाइंस हैं
• इसमें केवल शोषण की जांच की व्यवस्था की गई है
• महिला भी समान रूप से इस सुरक्षा व्यवस्था में शामिल है
• कोई भी कानून महिलाओं की सुरक्षा को कमजोर नहीं कर रहा
महिला के पास पहले से कौन-कौन से अधिकार हैं?
अगर किसी लड़की के साथ जबरदस्ती, उत्पीड़न या धमकी होती है, तो वह
• थाने में FIR दर्ज करा सकती है
• कॉलेज की अनुशासन समिति में शिकायत कर सकती है
• ICC कमेटी में केस कर सकती है
• और अब इन Guidelines के तहत भी सुरक्षा पा सकती है
यानी सुरक्षा के रास्ते पहले से भी ज्यादा हैं, कम नहीं हुए हैं।
छात्रों को डरने की नहीं, समझने की जरूरत
आज जरूरत इस बात की है कि छात्रों
सोशल मीडिया के झूठे दावों पर भरोसा न करें
किसी भी नियम को पूरा पढ़ें और अफवाहों से डरकर आपसी रिश्तों में शक न पैदा करें
सामान्य बातचीत, दोस्ती और सम्मानजनक व्यवहार करे
• कभी भी अपराध नहीं रहा है
• और न ही इन Guidelines के बाद अपराध बनेगा
यह सुरक्षा है, सजा नहीं
• उत्पीड़न रोकना
• भेदभाव कम करना
• कैंपस को सुरक्षित बनाना
यह नियम न तो लड़कों के खिलाफ है। नही किसी जाति के पक्ष या विरोध में है।
यह केवल उन मामलों में लागू होगा जहां वास्तव में शोषण या उत्पीड़न हुआ हो।
बाकी सब बातें प्रपोज करने पर केस
जनरल लड़की बोले तो OBC/SC पर कार्रवाई ये सब पूरी तरह अफवाह और राजनीतिक बयानबाज़ी हैं।
UGC Guidelines से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब FAQ
Q. क्या UGC Guidelines कोई नया कानून (Act) है?
Ans. नहीं, यह कोई कानून नहीं बल्कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों के लिए जारी की गई गाइडलाइंस हैं, जिनका उद्देश्य कैंपस में शिकायतों की जांच के लिए व्यवस्था बनाना है।
Q. क्या सिर्फ प्रपोज करने पर किसी छात्र पर केस लग सकता है?
Ans. नहीं, सामान्य और सम्मानजनक तरीके से प्रपोज करना अपराध नहीं है। केस तभी बनता है जब जबरदस्ती, पीछा करना या उत्पीड़न जैसा व्यवहार हो।
Q. क्या यह नियम सिर्फ SC/ST/OBC छात्रों के लिए लागू हैं?
Ans. नहीं, इन Guidelines में महिला उत्पीड़न और सभी प्रकार के भेदभाव की शिकायतें शामिल हैं। यह सभी छात्रों के लिए लागू होती हैं।
Q. क्या UGC Guidelines भारतीय न्याय संहिता (BNS) को ओवररूल करती हैं?
Ans. नहीं, BNS और अन्य महिला सुरक्षा कानून पहले की तरह लागू रहते हैं। UGC Guidelines उन्हें खत्म या बदलती नहीं हैं।
Q. कॉलेज में शिकायत करने की प्रक्रिया क्या होगी?
Ans. हर कॉलेज और विश्वविद्यालय को एक कमेटी बनानी होगी, जहां छात्र अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। कमेटी जांच कर उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी।
Q. क्या झूठी शिकायत करने पर भी कार्रवाई हो सकती है?
Ans. हाँ, अगर जांच में शिकायत झूठी पाई जाती है, तो कॉलेज के अनुशासन नियमों के तहत शिकायतकर्ता पर भी कार्रवाई हो सकती है।
Q. क्या छात्र सीधे पुलिस में भी शिकायत कर सकते हैं?
Ans. हाँ, अगर मामला गंभीर है तो छात्र सीधे थाने में FIR दर्ज करा सकते हैं। UGC Guidelines इसमें कोई रुकावट नहीं डालतीं।
Q. क्या इन Guidelines से छात्र-छात्राओं के सामान्य रिश्तों पर असर पड़ेगा?
Ans. नहीं, दोस्ती, बातचीत और सम्मानजनक व्यवहार पर कोई रोक नहीं है। केवल उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों पर कार्रवाई होती है।
Q. क्या इन Guidelines का दुरुपयोग संभव है?
Ans. हर नियम के दुरुपयोग की संभावना होती है, इसलिए जांच के लिए कमेटी बनाई जाती है ताकि बिना सबूत के कार्रवाई न हो।
Q. UGC Guidelines का असली उद्देश्य क्या है?
Ans. इनका उद्देश्य कैंपस को सुरक्षित बनाना, भेदभाव कम करना और पीड़ित छात्रों को जल्दी न्याय दिलाना है।
Date:-28-01-2026

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