वायरल मेट्रो तस्वीर की सच्चाई: जर्मन मैगज़ीन और अवैध प्रवासी की कहानी निकली फेक – Fact Check
“सोशल मीडिया का दावा फेल!” जर्मनी मेट्रो फोटो का सच!”

सोशल मीडिया पर इन दिनों मेट्रो में बैठे एक युवक और युवती की एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर के साथ एक लंबी भावनात्मक कहानी जोड़कर दावा किया जा रहा है कि युवक भारत का रहने वाला है, जो जर्मनी में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था। वायरल पोस्ट के अनुसार, उसके बगल में बैठी युवती एक मशहूर विदेशी अभिनेत्री है और युवक ने उसे पहचानने की कोशिश भी नहीं की।
पोस्ट में आगे दावा किया गया है कि यह तस्वीर पूरे जर्मनी में वायरल हो गई, जिसके बाद देश की लोकप्रिय मैगज़ीन Der Spiegel ने उस युवक को खोज निकाला। कहा गया कि उसकी गरीबी और ईमानदारी से प्रभावित होकर मैगज़ीन ने उसे 800 यूरो की नौकरी और रहने का परमिट भी दिलवा दिया।
लेकिन क्या यह कहानी सच है?
Demand Hindi News की फैक्ट-चेक टीम ने इस वायरल दावे की पड़ताल की और जो सामने आया वह पूरी तरह अलग था।
तस्वीर असली है, लेकिन कहानी 100% फेक
फैक्ट-चेक में सबसे पहले इस तस्वीर की सत्यता जांची गई। यह फोटो इंटरनेट पर पहले भी कई बार वायरल हो चुकी है और अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर होती रही है। किसी भी विश्वसनीय न्यूज़ सोर्स, फोटो एजेंसी या आधिकारिक रिपोर्ट में कहीं भी यह प्रमाण नहीं मिला कि तस्वीर में दिख रही युवती कोई अभिनेत्री है या तस्वीर किसी वास्तविक घटना से जुड़ी है।
इसका मतलब यह है कि तस्वीर के साथ जो कहानी लिखी जा रही है, उसका किसी भी तरह का तथ्यात्मक आधार मौजूद नहीं है।
Der Spiegel मैगज़ीन द्वारा युवक को खोजने का दावा झूठा
वायरल पोस्ट का सबसे बड़ा दावा यह है कि जर्मनी की मशहूर मैगज़ीन Der Spiegel ने उस युवक को खोजा और उसके बारे में रिपोर्ट छापी। लेकिन मैगज़ीन के सभी उपलब्ध डिजिटल और प्रिंट आर्काइव खंगालने के बाद भी ऐसी किसी रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
यदि इतना बड़ा मानव-रुचि वाला किस्सा सच होता, तो इंटरनेट पर उसकी कॉपी, उद्धरण या अन्य मीडिया में रेफरेंस ज़रूर मिलते। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
इससे साफ हो जाता है कि Der Spiegel वाली पूरी कहानी मनगढ़ंत है।
गैर-कानूनी प्रवासी को तुरंत नौकरी और परमिट – जर्मनी में असंभव
पोस्ट में दावा किया गया है कि युवक जर्मनी में बिना किसी दस्तावेज़ के रह रहा था और गैर-कानूनी तरीके से ट्रेन में सफर करता था। फिर अचानक उसे पोस्टमेन की नौकरी और रहने का परमिट मिल गया।
जर्मनी के इमिग्रेशन कानूनों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी स्थिति में पाए जाने पर सीधे नौकरी देना या तुरंत रेजिडेंस परमिट जारी करना संभव नहीं है। इसके लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसलिए यह दावा भी पूरी तरह झूठा है।
कहानी क्यों वायरल हुई?
सोशल मीडिया पर ऐसी कहानियाँ तेजी से वायरल होती हैं जिनमें-
- संघर्ष से जूझते आम व्यक्ति की भावनाएँ
- अचानक किस्मत बदलने वाली घटना
- किसी मशहूर शख्सियत की एंट्री
- और एक “नियति” वाला अंत
जैसे तत्व शामिल होते हैं।
यही वजह है कि लोग इस कहानी को वास्तविक समझकर शेयर करते गए।
सोशल मीडिया यूज़र्स को क्या सीख मिलती है?
- हर वायरल तस्वीर या कहानी सच नहीं होती।
- किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचना ज़रूरी है।
- फेक पोस्ट न सिर्फ़ भ्रम फैलाते हैं, बल्कि तस्वीर में दिख रहे लोगों की निजता को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
निष्कर्ष
Demand Hindi News की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि-
- तस्वीर असली हो सकती है,
- लेकिन कहानी का हर दावा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।
- न कोई अभिनेत्री, न कोई जर्मन मैगज़ीन की रिपोर्ट, न कोई नौकरी और न कोई परमिट।
इस वायरल पोस्ट को Demand Hindi News 100% फेक और मनगढ़ंत करार देता है।
PBLICERED BY- MUKESH KUMAR
DATE 06-12-2025
0 टिप्पणियाँ