LPG Gas Crisis: संसद में उठा गैस संकट का मुद्दा, होटल, मजदूर और छात्रों पर बढ़ी परेशानी
भारत में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर हर घर की जरूरत है। लेकिन हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों से गैस सिलेंडर की कमी, सप्लाई में देरी और कीमतों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इस मुद्दे पर संसद में भी बहस हुई, जहां विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।
इस गैस संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। होटल-ढाबा चलाने वाले छोटे कारोबारी, दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर, और पढ़ाई के लिए शहरों में रहने वाले छात्र भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
संसद में उठा LPG गैस का मुद्दा
संसद में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग की शिकायत भी सामने आई है।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई शहरों में लोग सुबह-सुबह एजेंसी के बाहर लाइन लगाकर सिलेंडर लेने का इंतजार कर रहे हैं। कहीं-कहीं सिलेंडर 1500 से 2000 रुपये तक ब्लैक में बिकने की शिकायत भी आई है। सरकार की ओर से कहा गया कि देश में घरेलू LPG की सप्लाई सामान्य है और अगर कहीं समस्या है तो वह स्थानीय वितरण से जुड़ी हो सकती है।
होटल और ढाबा कारोबार पर बड़ा असर
LPG की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबा और छोटे खाने-पीने के व्यवसाय पर पड़ा है। कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण होटल मालिकों को मेन्यू कम करना पड़ रहा है या अस्थायी रूप से दुकान बंद करनी पड़ रही है। कुछ जगहों पर होटल और रेस्टोरेंट को मजबूरी में लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा जैसे शहरों में तो सैकड़ों छोटे खाने-पीने के सेंटर बंद हो गए क्योंकि उन्हें समय पर कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। होटल मालिकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
दूसरे राज्य में काम करने वाले मजदूरों की समस्या
देश के बड़े शहरों में लाखों मजदूर दूसरे राज्यों से आकर काम करते हैं। इनमें निर्माण मजदूर, फैक्ट्री वर्कर और छोटे कामगार शामिल हैं।इन मजदूरों में से कई लोग सामूहिक रूप से कमरा लेकर रहते हैं और मिलकर खाना बनाते हैं। जब LPG सिलेंडर समय पर नहीं मिलता तो उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ मजदूरों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में बाहर होटल में खाना खाना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ जाता है। वहीं कुछ जगहों पर मजदूर लकड़ी या कोयले पर खाना बनाने लगे हैं।
दूसरे शहर में पढ़ने वाले छात्रों की परेशानी
LPG संकट का असर उन छात्रों पर भी पड़ रहा है जो पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर शहरों में रहते हैं। कई हॉस्टल और PG में गैस की कमी के कारण मेन्यू बदलना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर कुछ हॉस्टलों में रोटी और डोसा जैसे गैस ज्यादा खर्च करने वाले खाने कम कर दिए गए हैं और सिर्फ चावल आधारित भोजन परोसना शुरू किया गया है। इससे हजारों छात्र और नौकरी करने वाले युवा प्रभावित हो रहे हैं, जो हॉस्टल के खाने पर ही निर्भर रहते हैं।
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स्ट्रीट फूड और छोटे व्यापारियों पर संकट
LPG सिलेंडर की कमी का असर स्ट्रीट फूड बेचने वालों पर भी पड़ा है। टिक्की, समोसा और चाट बेचने वाले छोटे दुकानदार कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर होते हैं। जब सिलेंडर की सप्लाई बाधित होती है तो उनका चूल्हा ही बंद हो जाता है और रोजी-रोटी पर असर पड़ता है। भारत की स्ट्रीट फूड इंडस्ट्री लाखों लोगों को रोजगार देती है, इसलिए यह संकट छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
LPG संकट की वजह क्या है
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति: मध्य-पूर्व में तनाव के कारण गैस सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ा है।
घरेलू और कमर्शियल गैस की प्राथमिकता: सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई कुछ जगहों पर सीमित की है।
जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग: कुछ जगहों पर सिलेंडर की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आई हैं।
Lpg gas cylinder sankat se निपटने के लिए सरकार के कदम
वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की सलाह दिया सरकार का कहना है कि जल्द ही सप्लाई पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी। LPG गैस का संकट केवल एक ईंधन की समस्या नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। होटल-ढाबा कारोबार, मजदूर, छात्र और छोटे व्यापारी सभी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि गैस सप्लाई सिस्टम को मजबूत किया जाए और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि आम लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
PBLISHED BY: Mukesh Kumar, Date: 13-03-2026

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