प्रोफेशनल सिंगर तलहा अंजुम ने नेपाल कॉन्सर्ट में बुलाया स्टार, सोशल मीडिया पर धमाका किया
इस दौरान नेपाल में एक लाइव कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया, जिसमें पाकिस्तान के मशहूर रैपर तलहा अंजुम ने भारतीय स्टार वॉल्कर पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लालची कचरा गायब हो गया। भारतीय जहां उनके फैन इस बेहद आक्रामक इरादे से काम कर रहे हैं, वहीं कुछ फिल्मी बिजनेस से लेकर कड़क अपंगता जाहिर तौर पर कर रहे हैं।
यह मामला पूरा कुछ ही घंटों में अंतरराष्ट्रीय सुरखियां बन गया और दोनों देशों के सोशल मीडिया पर नजर-नजर आई। आइए जानते हैं पूरा विवाद, तल्ला की सफाई और अवलोकन की प्रतिक्रिया का विस्तार।
घटना कैसे शुरू हुई?
नेपाल में आयोजित एक बड़े वैश्विक महोत्सव में तलहा अंजुम को फॉर्म देने के लिए बुलाया गया था। शो के दौरान जैसे ही प्रधानमंत्री ने अपने चारों ओर के भारतीय साम्राज्य को झुकाना शुरू किया, तलहा ने भी दर्शकों से रैलियां और मंच पर उन्हें उछालने लगे।
यह दृश्य ही पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। लेकिन यह खुशी सिर्फ अन्यत्र तक ही सीमित नहीं रही-सोशल मीडिया वीडियो पर वायरल होती है जिसमें अलग-अलग कलाकार सामने आते हैं।
अंतःचित्र क्यों भाग्य?
तलहा अंजुम ने पाकिस्तान से शेयरधारक रखे हैं, ऐसे में पाकिस्तान के कुछ लोगों ने इसे "अपमानजनक" और "देशविरोधी" पोर्टफोलियो में रखा है।
उनकी नाराज़गी के तीन मुख्य कारण रहे-
1. विदेशी कलाकार भारतीय ध्वज बुलाना 'गलत' के बारे में बताया गया।
कई विरोधियों का मानना है कि किसी दूसरे देश के ध्वज मंच पर कलाकारों को नहीं उतारा जाना चाहिए, खासकर जब दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हो।
2. राजनीति को लेकर गलत व्याख्या।
कुछ लोगों का कहना था कि यह 'राजनीतिक संदेश' देने की कोशिश है, जिसे किसी भी कलाकार को नहीं दिया जाना चाहिए।
3. सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद की बहस।
इस घटना के बाद दोनों देशों के कई संयुक्त राष्ट्र और कला की स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई।
भारतीय कारीगर ने क्यों की कीमत?
जहां पाकिस्तान का विरोध सामने आया, वहीं भारत के विद्रोहियों ने तल्ला का खुले दिल से स्वागत किया।
भारतीय दर्शकों की प्रमुख प्रतिक्रियाएँ-
1. कला की कोई सीमा नहीं - यह संदेश संदेश में बताया गया है।
2. तल्लाह के कदम को स्मारकीय और सकारात्मक संकेत दिया गया।
3. उन्हें "स्पोर्टिंग," "प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट" और "बर्बर दिल वाला पर फॉर्मर" जैसे डिग्रीयां मिलें।
कई भारतीयों ने यह भी कहा कि कलाकारों को राजनीति से ऊपर के राक्षसों और भाईचारे का संदेश देना चाहिए-और तल्लाह ने यही किया है।
तलहा अंजुम ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद तल्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि-
"मेरी कला की कोई सीमा नहीं है। मैं जहां भी जाता हूं, वहां के दर्शक सम्मान करते हैं। अगर दर्शक मुझे प्यार देते हैं, तो मैं भी वहीं लौट आता हूं।"
उन्होंने यह भी कहा कि वे राजनीति के बजाय संगीत के माध्यम से लोगों को लाभान्वित करते हैं। तलहा अंजुम के अनुसार, अगर भविष्य में इस तरह की फिल्म पर विवाद हुआ, तो वे अपने मूल सिद्धांत को नहीं बदलेंगे और दर्शकों का सम्मान करेंगे।
नेपाल के दर्शकों की प्रतिक्रिया
नेपाल में दर्शकों ने यह कदम बेहद सकारात्मक रूप से उठाया।
उनका कहना है- तलहा ने मंच पर एक साथ जोड़ने की कोशिश की
कई दर्शकों की बैंडबाजे तो कंसर्ट का सबसे पहले भव्यता से भरपूर थीं और सभी ने इस पल का ऑर्केस्ट्रा उठाया।
कला और राष्ट्रवाद-हमेशा से संदेश विषय
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब किसी कलाकार के कदम पर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ हो। इतिहास में कई बार भारतीय, विदेशी, नेपाली, अमेरिकी, ब्रिटिश कलाकारों ने प्रदर्शन के दौरान दूसरे देशों के झंडे गाड़ने का काम किया-कभी-कभी एकता के संदेश के लिए, उदाहरण के लिए बनाया गया।
कला का उद्देश्य हमेशा लोगों को शामिल करना है, लेकिन राष्ट्रवाद की बहस अक्सर इस भावना पर भारी पड़ती है।
तलहा अंजुम का ये कदम भी इसी बहस के केंद्र में है
किसी भी देश का झंडा फहराने की कला में कौन से कलाकार शामिल हैं?
कानूनी रूप से देखें तो-
• भारत:
भारतीय ध्वज का सम्मान करना किसी भी विदेशी को लंदन करना मना नहीं है।
• पाकिस्तान:
चार नागरिकों को दूसरे देश के झंडे फहराने पर सीधे तौर पर रोक नहीं है, लेकिन जनभावनाएं संकेत हो सकती हैं।
• नेपाल :
नेपाल में आयोजकों ने इस पर कोई दिलचस्प बात नहीं रखी।
इसलिए यह मामला कानूनी से लेकर बड़े पैमाने पर सामाजिक और धार्मिक विवाद बन गया है।
सोशल मीडिया गूँज क्यों उठाओ?
इस घटना के बाद ट्विटर पर शालीन और यूट्यूब पर वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं।
कई भारतीय जासूसों ने इसे भारत-नेपाल- पाकिस्तान ट्रायो का अनोखा पल बताया है, वहीं कुछ अन्य अनजान लोगों ने इसे ''अनावश्यक विवाद'' कहते हुए लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ऐसे टैग ट्रेंड कर रहे हैं:
#तलहाअंजुम
#भारत
#पाकिस्तान
यह विवाद क्या संदेश देता है?
यह घटना बताती है कि-
1. कलाकार समुद्रतट से ऊपर की ओर जाते हैं।
2. आम लोगों के चेहरे अलग-अलग नजरिया रख सकते हैं।
3. सांस्कृतिक सादृश्य-संबंधी राजनीति से जुड़ी फिल्में हमेशा के लिए देखना उचित नहीं है।
4. कला का उद्देश्य विभाजन नहीं—एकता और प्रेम का विखंडन होता है।
यह एस्टामेंट भी आगे क्या है?
संभावना है कि आने वाले दिनों में यह फ्रेंडशिप मीडिया और सोशल मीडिया पर दोनों की चर्चा बनी रहेगी।
हालाँकि, तल्हा के बयान के बाद विवाद थोड़ा शांत जरूर दिख रहा है, लेकिन सोशल मीडिया कम्यूनिटी के कुछ कम्यूनिटी में आंतकगी अभी भी जारी है।
निष्कर्ष
नेपाल के कॉन्सर्ट में मशहूर सिंगर तल्ला अंजुम ने भारतीय तिरंगे के साथ एक ऐसी जोड़ी बनाई थी, जिसे कई लोगों ने एक साथ जोड़ा था, लेकिन साथ में कई लोगों ने अलग-अलग नजरियों से भी काम किया था।
भारतीय दर्शकों ने इसे दोस्ती और सम्मान का प्रतीक माना, जबकि कुछ विदेशी दर्शकों ने इसे नकारात्मक रूप में लिया।
सच्चाई तो यह है कि दुनिया में कला का एक अलग ही रंग होता है-जहाँ के कला देश, धर्म या क्षेत्र से सिर्फ संगीत और मानव जाति तक के क्षेत्र की कोशिश की जाती है।
तल्लाह अंजुम का यह स्टेप स्क्रीच सीमाल हो, लेकिन यह साफा संदेश संगीत की सीमा नहीं देता है।
मुकेश कुमार द्वारा प्रकाशित

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